रोबोट का अविष्कार हजारों वर्ष पूर्व भारत में हुआ था ?
वसंतपंचमी पर माँ सरस्वती के मंदिर भोजशाला और राजा भोज की चर्चा प्रासंगिक तो है ही.. राजा भोज की महनीयता की अनुभूति का भी प्रसंग है। राजाभोज युद्धभूमि में जितने प्रतापी सिद्ध हुए, उतने ही उत्कट विद्वान और कलाओं के प्रश्रयदाता भी थे। राजा भोज का समरांगणसूत्रधार ग्रंथ राजाभोज की महानता के साथ ही तत्कालिन समय में भारत की वैज्ञानिक उत्कृष्टता का भी साक्ष्य है।
समरांगणसूत्रधार में मानव जैसे समस्त क्रियाकलापों को करने वाले यंत्र, जिसे हम रोबोट कह सकते है, का विस्तार से वर्णन है :
ग्रीवाचलनप्रसरणविकुज्चनादीनि विदधाति।
करग्रहणाताम्बुलप्रदानजलसेचनप्रणामादि।।
इसी ग्रंथ में स्वचालित द्रारपाल का भी विस्तार से वर्णन है।
पुंसो दारुजमुर्ध्व रूपं कृत्वा निकेतनद्वारि।
तत्करयोजित दंड निरुणद्धि प्रविशता वर्त।
यही नही, राजाभोज के समरांगणसूत्रधार में हाइड्रोलिक मशीन तथा बिजली बनाने का भी विशद वर्णन है।
धारा च जलभारश्च पयसो भ्रमणं तथा यथोच्छ्रायो यथाधिक्यं यथा नीरंध्रतापि च।
एवमादीनि भूजस्य जलजानि प्रचक्षते॥
वस्तुत: राजाभोज एवं उनका युग भारत की बौद्धिक और वैज्ञानिक सर्वोत्कृष्टता का युग था। भोजशाला ज्ञान-विज्ञान का बड़ा केन्द्र थी, जहाँ पाँच हजार से अधिक विद्यार्थी विभिन्न धाराओं का अध्ययन करते थे।
भोजशाला वाग्देवी माँ सरस्वती की लंदन के संग्रहालय में रखी प्रतिमा की प्रतीक्षा कर रही है। हमारे संकल्प से ही श्यामजीकृष्ण वर्मा के अवशेष पुन: भारत में आ सके।निस्संदेह, वाग्देवी माँ सरस्वती की भोजशाला में पुनर्स्थापना पुरे समाज के लिये गौरव का विषय होगा।
