Notice: Function _load_textdomain_just_in_time was called incorrectly. Translation loading for the eikra domain was triggered too early. This is usually an indicator for some code in the plugin or theme running too early. Translations should be loaded at the init action or later. Please see Debugging in WordPress for more information. (This message was added in version 6.7.0.) in /home/nityam/public_html/wp-includes/functions.php on line 6121
मां कैलादेवी मंदिर में चातुर्मास महोत्सव – NITYAM Foundation

मां कैलादेवी मंदिर में चातुर्मास महोत्सव

देवास। कैलादेवी मंदिर में चातुर्मास महोत्सव के अंतर्गत पार्थिव शिवलिंग का निर्माण किया जा रहा है। मंदिर में अब तक एक लाख से अधिक पार्थिव शिवलिंग का निर्माण व अभिषेक हो चुका है। प्रतिदिन सुबह 8 से 10 बजे तक पार्थिव शिवलिंग का निर्माण व इसके पश्चात दोपहर 12 बजे तक अभिषेक हो रहा है। गुरुवार को भी बड़ी संख्या में पार्थिव शिवलिंग का निर्माण किया गया।

इस अवसर पर दंडी स्वामी हेमेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने पार्थिव शिवलिंग के पूजन-अभिषेक का महत्व बताते हुए कहा, कि त्रेता युग में स्वर्ण, द्वापर में पारा एवं कलियुग में पार्थिव शिवलिंग का महत्व है। जो फल स्वर्ण व पारे के शिवलिंग निर्माण का है, उससे कई गुना अधिक फल कलियुग में पार्थिव शिवलिंग बनाने से प्राप्त होता है। स्वामीजी ने कहा, कि शिवलिंग निर्माण की संख्या के आधार पर फल भी बताए गए हैं। प्रतिदिन 500 पार्थिव शिवलिंग बनाने पर दरिद्रता दूर होती है, एक हजार शिवलिंग के निर्माण से मकान का सुख प्राप्त हो जाता है। प्रतिदिन 1500 शिवलिंग बनाने पर सुख-समृद्धि, धन की प्राप्ति होती है। जो शिवभक्त एक करोड़ पार्थिव शिवलिंग का निर्माण कर लेता है, उसे धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। पार्थिव शिवलिंग के निर्माण से समस्त मनोकामना पूर्ण होती है। स्वामीजी ने बिल्वपत्र का महत्व बताते हुए कहा, कि बिल्वपत्र के वृक्ष में शिव-पार्वती का वास होता है। इस वृक्ष के नीचे किसी ब्राह्मण को दूध से निर्मित पकवान वाला भोजन करवाने पर अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त होता है। जो भक्त रुद्राक्ष धारण कर भस्म लगाता है और शिवनाम का जाप करता है, वह चलता-फिरता त्रिवेणी है अर्थात गंगा, यमुना व सरस्वती के समान है। स्वामीजी ने कहा, कि जहां पार्थिव शिवलिंग का निर्माण हो जाता है, वह शिवक्षेत्र हो जाता है। हम अधिक मास व सावन मास में शिवलिंग का निर्माण कर रहे हैं। यह अद्भुत है जब हरि-हर दोनों का संयोग हमें प्राप्त हो रहा है।

मां कैलादेवी मंदिर उत्सव समिति के मन्नूलाल गर्ग ने बताया मंदिर में पार्थिव शिवलिंग 31 अगस्त तक बनाए जाएंगे। चातुर्मास महोत्सव के अंतर्गत भजन-कीर्तन, अभिषेक आदि अनुष्ठान हो रहे हैं। दंडी स्वामीजी अब तक 27 चातुर्मास पूर्ण कर चुके हैं। उनके मार्गदर्शन में 50 लाख से अधिक पार्थिव शिवलिंग का निर्माण हुआ है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *